महिला कैदियों की सुविधाओं से पुनर्वास तक, देहरादून में तीन दिन चलेगा राष्ट्रीय परामर्श

- राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर करेंगी बैठक की अगुवाई
- महिला सशक्तीकरण, जनसुनवाई और संस्थागत व्यवस्थाओं की भी होगी समीक्षा
- जिला जेल और वन स्टॉप सेंटर का भी होगा निरीक्षण
देहरादून: महिला कैदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, अधिकारों और पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए देहरादून में 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित की जाएगी। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर इसकी अध्यक्षता करेंगी। बैठक में देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ जेल अधिकारी महिला कैदियों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने और जेल प्रशासन को लैंगिक संवेदनशील बनाने पर चर्चा करेंगे।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष 30 अक्टूबर से 2 नवंबर तक देहरादून और ऋषिकेश के दौरे पर रहेंगी। इस दौरान महिला सशक्तीकरण, शिकायतों के निस्तारण, युवाओं की भागीदारी और विभिन्न संस्थानों की व्यवस्थाओं की समीक्षा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे।
ग्राफिक एरा में मॉक पार्लियामेंट
30 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में मॉक पार्लियामेंट का उद्घाटन कार्यक्रम निर्धारित है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को संसदीय कार्यप्रणाली, विधायी बहस और लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया से परिचित कराना तथा युवाओं, विशेषकर युवा महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करना है।
इसी दिन दोपहर 12 बजे देहरादून पुलिस लाइन सभागार में राष्ट्रीय महिला आयोग की जनसुनवाई होगी, जहां महिलाएं अपनी शिकायतें सीधे आयोग की अध्यक्ष के समक्ष रख सकेंगी। दोनों कार्यक्रमों के समय में आधे घंटे का टकराव है। जनसुनवाई के समय में बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
दोपहर 3:30 से शाम 5:30 बजे तक ऋषिकेश स्थित एम्स सभागार में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का सम्मेलन होगा। इसमें महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और सशक्तीकरण में समूहों की भूमिका पर चर्चा होगी। इसके बाद स्वर्गाश्रम में गंगा आरती का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
जेलों में सुविधाओं और पुनर्वास पर चर्चा
31 अक्टूबर को सुबह 11 बजे दून मेडिकल कॉलेज में ‘शी इज ए चेंजमेकर’ कार्यक्रम और दोपहर 1:30 बजे भारतीय सैन्य अकादमी में संवाद सत्र आयोजित होगा। शाम 4 बजे देहरादून स्थित गेटवे बाय ताज में राष्ट्रीय परामर्श बैठक का उद्घाटन किया जाएगा।
बैठक में जेलों में भीड़भाड़, बुनियादी सुविधाओं, मातृत्व एवं प्रजनन स्वास्थ्य, मासिक धर्म स्वच्छता, मानसिक स्वास्थ्य और महिला कैदियों की सुरक्षा पर चर्चा होगी। साथ ही, महिला कैदियों के साथ रहने वाले बच्चों के कल्याण, विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता तथा बुजुर्ग और दिव्यांग महिला कैदियों की जरूरतों पर भी विचार किया जाएगा।
महिला कैदियों के लिए शिक्षा, कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रिहाई के बाद पुनर्वास के अवसर बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 की धारा 10 के तहत आयोग को जेलों और अन्य हिरासत केंद्रों में महिलाओं की स्थिति का निरीक्षण कर सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करने का अधिकार है।
एक नवंबर को जिला जेल का निरीक्षण
आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर एक नवंबर को देहरादून जिला जेल का निरीक्षण करेंगी। दो नवंबर को आयोग की सदस्य निवेदिता सुब्रमण्यम और अर्चना मिश्रा क्रमशः वन स्टॉप सेंटर और एक अस्पताल का निरीक्षण करेंगी। इन निरीक्षणों में महिलाओं की सुरक्षा, देखभाल और कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। इसी दिन राष्ट्रीय परामर्श बैठक का समापन होगा।
आयोग के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं की शिकायतों के निस्तारण को प्रभावी बनाना, संस्थागत जवाबदेही बढ़ाना और महिलाओं के अधिकारों, गरिमा, सुरक्षा एवं कल्याण को सुनिश्चित करना है।




