उत्तराखंडराज्य

22 मार्च को दून में अन्तर्राष्ट्रीय मैरिन टाइम कांफ्रेंस ‘आरोहण’

देहरादून: उत्तराखंड में देश-विदेश के समुद्री क्षेत्र में बेहतर नेटवर्किंग से विकास, निवेश और रोजगार सृजन के अवसरों की सम्भावनाओं को लेकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की मेरिन टाइम कांफ्रेंस ‘आरोहण’ 22 मार्च को राजधानी दून में होगी। इस अन्तर्राष्ट्रीय महत्व की कांफ्रेंस में देश-विदेश के नामचीन शिप मालिक, ट्रेडर्स, माइनर्स और नीति-नियंता, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की तकनीक की इस क्षेत्र में बढ़ती सम्भवनाओं पर भी विचर मथन करेंगे। चार सत्र में आयोजित इस अन्तर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का शुभारंभ डा० आर मीनाक्षी सुन्दरम (IAS) प्रमुख सचिव उर्जा उत्तराखण्ड शासन करेंगे।

कांफ्रेंस के मुख्य आयोजक और INTEGRATED MARITIME EXCHANGE (IME) के सह-संस्थापक कैप्टन कुनाल उनियाल एवं विकास गड्डू ने आज प्रेस वार्ता में बताया कि यह अन्तर्राष्ट्रीय मैरिन टाइम कांफ्रेंस इस क्षेत्र में राज्य के लिए नई सम्भावनाएँ तलाशने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार हो रहे इस अन्तराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में शिप ओनर्स, ट्रेडर्स, माइनर्स और वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था की प्रमुख हस्तियों और संस्थानों को उत्तराखंड के केंद्र में लाएगी। सम्मेलन यह उजागर करेगा कि हमारे पहाड़ी राज्य के लिए समुद्री क्षेत्रों से गहरे संबंधों का उपयोग कैसे विकास, निवेश और रोजगार सृजन के लिए किया जा सकता है। कांफ्रेंस के प्रयोजक ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी और अमेरिका की प्रसिद्ध शिपिंग संस्था शिपफिनेक्स हैं।

इसके अलावा, कई प्रमुख शिपिंग कंपनियों के सीईओ और एमडी, विदेशों में कार्यरत हैं, जो उत्तराखंड से विशेष रूप से पहाडी समुदाय से आते हैं। उनकी उपस्थिति और सफलता इस बात का प्रमाण होगा कि यह राज्य कितनी प्रतिभा और संभावनाओं से भरा हुआ है। आरोहण का उद्देश्य इस क्षेत्र के उद्यमियों और उत्तराखंड के युवाओं के बीच सेतु का निर्माण करना है जिससे मॅटरशिप, रोजगार और उद्यमशीलता के नए द्वार खुल सकें। कांफ्रेंस के मध्य कैप्टन कुनाल उनियाल की स्वलिखित पुस्तकों का विमोचन भी होगा।

कैप्टन कुनाल उनियाल ने बताया कि उत्तराखंड, एआई और डिजिटल परिवर्तन में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे राज्य के पास एआई-आधारित समुद्री समाधानों का केंद्र बनने का एक अनूठा अवसर है। वाणिज्यिक शिपिंग में अत्याधुनिक तकनीकों के कार्यान्वयन से न केवल राजस्व उत्पन्न होगा बल्कि उत्तराखंड को समुद्री तकनीकी नवाचार में एक अग्रणी राज्य के रूप में भी स्थापित करेगा।

 

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