लोकसभा की प्राक्कलन समिति माणा पहुंची, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की विस्तृत समीक्षा

चमोली: भारत के प्रथम गांव माणा में लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने राज्य में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत किए जा रहे विकास कार्यों की गहन समीक्षा की। समिति की अध्यक्षता सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने की। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्थानीय प्रशासन, ग्रामीणों तथा संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
समिति पहुंचते ही स्थानीय ग्रामीणों ने डॉ. संजय जायसवाल और अन्य सांसदों का पारंपरिक रीति-रिवाजों, स्थानीय संस्कृति तथा लोकगीतों के साथ भव्य स्वागत किया। ग्रामीणों ने अपनी लोक परंपराओं को प्रस्तुत करते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया।
स्वागत के बाद समिति अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने स्थानीय ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत आने वाले गांवों के विकास से संबंधित अपनी सभी आवश्यकताएं और मांगें सीधे समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत मांगों और सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने जोर दिया कि विकास योजनाओं की सफलता के लिए स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। ग्रामीण अपने क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं और प्राथमिकताओं से सबसे अच्छी तरह परिचित होते हैं। इसलिए गांवों में विकास कार्यों की योजना तैयार करते समय स्थानीय आवश्यकताओं को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए।
समिति अध्यक्ष ने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे सड़क, दूरसंचार, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पर्यटन और अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित अपनी आवश्यकताएं अधिकारियों के समक्ष रखें। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सहभागिता से विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा और योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से गांव के प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा।
डॉ. जायसवाल ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम अभी अपने प्रारंभिक चरण में है, लेकिन आने वाले वर्षों में यह सीमावर्ती गांवों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में व्यापक परिवर्तन लाएगा। उनका उद्देश्य केवल आधारभूत संरचनाएं बनाने तक सीमित नहीं है। यह सीमावर्ती गांवों को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।
उन्होंने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री का संकल्प है कि देश के सीमावर्ती और दूरस्थ गांवों में सड़क संपर्क, दूरसंचार सुविधाएं तथा सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम इसी संकल्प को धरातल पर उतारने का महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। सड़क संपर्क बेहतर होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। दूरसंचार और इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार से ग्रामीण शिक्षा, डिजिटल सेवाएं, बैंकिंग और रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकेंगे।
समिति के समक्ष राज्य की ओर से वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के सहायक नोडल अधिकारी डॉ. प्रभाकर बेबनी ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी वाइब्रेंट विलेज गांवों में अब तक हुई प्रगति, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रयासों की जानकारी समिति को दी।
डॉ. बेबनी ने विशेष रूप से आदि कैलाश और नीति क्षेत्र में राज्य पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित उच्च हिमालयी मैराथन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन आयोजनों से वाइब्रेंट गांवों में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से सामाजिक गतिविधियां गति पा रही हैं। साथ ही आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हो रही है और नए रोजगार-आजीविका के अवसर सृजित हो रहे हैं।
प्रस्तुतीकरण में वाइब्रेंट गांवों में पर्यटन विभाग द्वारा विकसित आधारभूत ढांचे, पर्यटन सुविधाओं, संपर्क व्यवस्था और अन्य बुनियादी परियोजनाओं की भी जानकारी दी गई। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को पर्यटन केंद्र बनाने तथा स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है।
बैठक के दौरान समिति ने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की वर्तमान प्रगति पर जानकारी ली। अधिकारियों से विकास कार्यों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर चर्चा हुई। समिति ने निर्देश दिया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए, विकास योजनाओं का लाभ हर परिवार तक पहुंचना चाहिए तथा स्थानीय परिस्थितियों, भौगोलिक कठिनाइयों और मौसम की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किए जाएं।
कार्यक्रम का संचालन जोशीमठ के खंड विकास अधिकारी मोहन जोशी ने किया।




