फर्जी प्रमाणपत्रों पर 10 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त, जांच में बड़ा खुलासा

- रामनगर बोर्ड की जांच में प्रमाणपत्र कूटरचित मिलने पर बागेश्वर
- कपकोट और कांडा के 10 शिक्षकों पर कार्रवाई, कानूनी कार्रवाई के निर्देश
बागेश्वर: राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी और कूटरचित शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर कार्यरत पाए गए 10 शिक्षकों पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय सत्यापन में रामनगर बोर्ड की जांच के दौरान इन शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद सभी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।
मामला बागेश्वर, कपकोट और कांडा विकासखंड के प्राथमिक विद्यालयों से जुड़ा है। विभागीय सत्यापन प्रक्रिया के तहत संबंधित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र रामनगर बोर्ड को जांच के लिए भेजे गए थे। बोर्ड की रिपोर्ट में प्रमाणपत्र कूटरचित पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने सेवा समाप्ति की कार्रवाई की।
इन 10 शिक्षकों पर हुई कार्रवाई
कार्रवाई की जद में राप्रावि ससोला, कांडा की कमला देवी, राप्रावि रीमा क्वीटी के चंद्र प्रकाश आर्य, राप्रावि उछात, बागेश्वर की रजनी, राप्रावि स्यालढूंगा की लक्ष्मी आर्य, राप्रावि चनौस चनूसी के रोहित कुमार, राप्रावि नरगोली, कांडा की नेहा, राप्रावि ठेली, कपकोट के संजय कुमार, राप्रावि जलमानी के अरविंद कुमार, राप्रावि सुदिल, बागेश्वर के पंकज कुमार और राप्रावि उडियारी जगथान की प्रियंका शामिल हैं।
कानूनी कार्रवाई के निर्देश
प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक आशा राम ने बताया कि सत्यापन के दौरान 10 शिक्षकों के दस्तावेज रामनगर बोर्ड की जांच में कूटरचित पाए गए। बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर सभी की सेवा समाप्त कर दी गई है। उन्होंने बताया कि कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित उपशिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
नियुक्ति के समय सत्यापन पर सवाल
इस मामले में प्रमाणपत्रों के लंबे समय बाद फर्जी पाए जाने से नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह भी जांच का विषय है कि जिन प्रमाणपत्रों को रामनगर बोर्ड की जांच में कूटरचित पाया गया, उनका नियुक्ति के समय किस स्तर पर सत्यापन किया गया था और संबंधित अभिलेखों की जांच में चूक कैसे हुई।




