उत्तराखंडताजा खबरें

नीट यूजी फर्जीवाड़े का खुलासा, 45 लाख में एमबीबीएस दाखिले का सौदा

  • स्वतंत्रता सेनानी कोटे के फर्जी प्रमाणपत्र से तीन दाखिले, 20-20 लाख रुपये लिए एडवांस

देहरादून: नीट यूजी-2025 में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में एसआईटी ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में तीन अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने और उनके आधार पर अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में दाखिला कराने का मामला सामने आया है।

पुलिस के अनुसार, प्रत्येक अभ्यर्थी के एमबीबीएस दाखिले के लिए 45 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। आरोप है कि अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे, जबकि शेष रकम दाखिले और कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई थी।

दो थानों में दर्ज हुए मुकदमे

पुलिस के मुताबिक, 13 सितंबर को थाना रायपुर और क्लेमेंटाउन में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने की शिकायत मिली थी। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद दोनों थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। टीम ने संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के साथ शिक्षण संस्थानों से भी रिकॉर्ड जुटाए। जांच में दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। शिक्षण संस्थानों से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई गई।

कंसल्टेंसी के जरिए दाखिले का आरोप

जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपित रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, मेरठ में वह ‘मिकोडो (MECODO) पाठशाला’ नाम से कंपनी संचालित करता था। कंपनी के माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिले कराने का काम किया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, अरविन्द कुमार रूपेश का पुराना परिचित है। अपनी बेटी के एमबीबीएस दाखिले के लिए उसने रूपेश से संपर्क किया था। इसके साथ ही दो परिचितों के बच्चों के दाखिले की बात भी सामने आई। आरोप है कि रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से दाखिला दिलाने का भरोसा दिया।

फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला

एसआईटी के अनुसार, रूपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और उनके आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला लिया।

पुलिस के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने रूपेश पंडित और अरविन्द कुमार को पूछताछ के लिए थाना रायपुर बुलाया। पूछताछ और जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

एसआईटी अब मामले में अन्य आरोपितों की भूमिका, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की पूरी प्रक्रिया और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

गिरफ्तार आरोपित

  • रूपेश पंडित, निवासी पूर्णिया, बिहार; हाल निवासी ब्रह्मपुरी, मेरठ।
  • अरविन्द कुमार, निवासी बहादरपुर खादर, थाना लक्सर, हरिद्वार।

Related Articles

Back to top button