उत्तराखंड में निगम कर्मचारियों को 30 दिन का तदर्थ बोनस देने की तैयारी

- अधिकतम सात हजार रुपये की गणना सीमा निर्धारित
- वित्तीय स्थिति के आधार पर उपक्रम खुद लेंगे फैसला
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में कार्यरत कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए तदर्थ बोनस देने का रास्ता साफ कर दिया है। अब संबंधित निगम और सार्वजनिक उपक्रम अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन कर पात्र कर्मचारियों को बोनस देने का निर्णय स्वयं ले सकेंगे। इसके लिए वित्त विभाग से अलग से सहमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
औद्योगिक विकास अनुभाग-2 के सचिव विनय शंकर पांडेय ने पांच नवंबर को इस संबंध में सभी सार्वजनिक उपक्रमों एवं निगमों के प्रशासनिक विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था वित्त विभाग की ओर से दो नवंबर को जारी शासनादेश के क्रम में की गई है।
वित्तीय स्थिति के आधार पर होगा निर्णय
वित्त विभाग के शासनादेश में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों के पात्र कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए उत्पादकता असंबद्ध यानी तदर्थ बोनस देने की स्वीकृति दी गई है।
इसी क्रम में सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों को भी निर्धारित शर्तों के तहत बोनस देने का अधिकार दिया गया है। जिन संस्थानों में बोनस की देयता बनती है और जो अपने संसाधनों से इसका वित्तीय भार उठाने में सक्षम हैं, वे पात्र कर्मचारियों को बोनस देने का निर्णय स्वयं ले सकेंगे।
सचिव विनय शंकर पांडेय ने प्रशासनिक विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ संस्थानों की वित्तीय स्थिति का आकलन करें। भुगतान में सक्षम संस्थानों में शासनादेश के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाए। इसकी जानकारी सार्वजनिक उद्यम विभाग को भी देनी होगी।
अधिकतम सात हजार रुपये की गणना सीमा
शासनादेश के अनुसार समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों तथा समूह ‘ख’ के अराजपत्रित कर्मचारियों को तदर्थ बोनस का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए ग्रेड वेतन की अधिकतम सीमा 4800 रुपये यानी पुनरीक्षित वेतनमान में लेवल-8 तक निर्धारित की गई है। उत्पादकता आधारित बोनस योजना के दायरे में नहीं आने वाले कर्मचारी इसके पात्र होंगे।
केंद्र सरकार के आदेश के अनुरूप अधिकतम 30 दिन की परिलब्धियों के आधार पर सात हजार रुपये की गणना सीमा तय की गई है। हालांकि, वास्तविक भुगतान कर्मचारी की पात्रता और निर्धारित गणना के अनुसार होगा।
छह माह की सेवा अनिवार्य, दैनिक वेतनभोगियों को भी लाभ
बोनस के लिए कर्मचारी का 31 मार्च 2026 को सेवा में कार्यरत होना और इस तिथि तक कम से कम छह माह की निरंतर एवं संतोषजनक सेवा पूरी करना अनिवार्य है। एक वर्ष से कम लेकिन छह माह या उससे अधिक सेवा वाले कर्मचारियों को सेवा अवधि के अनुपात में बोनस मिलेगा।
कैजुअल और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी निर्धारित शर्तों के तहत पात्र होंगे। छह कार्यदिवस वाले कार्यालयों में पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन और पांच कार्यदिवस वाले कार्यालयों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 206 दिन काम करने वाले कर्मचारियों को लाभ दिया जा सकेगा। इनके लिए अधिकतम 1200 रुपये की मासिक परिलब्धि के आधार पर 30 दिनों का तदर्थ बोनस 1184 रुपये निर्धारित किया गया है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई वाले कर्मचारियों पर प्रतिबंध
शासनादेश के अनुसार जिन कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमा लंबित है, उनका बोनस भुगतान मामले के परिणाम आने तक स्थगित रहेगा। दोषमुक्त होने पर नियमानुसार लाभ दिया जा सकेगा, जबकि वर्ष 2025-26 में विभागीय कार्रवाई अथवा आपराधिक मुकदमे में दंडित कर्मचारियों को बोनस देय नहीं होगा।
अवैतनिक अवकाश को छोड़कर अन्य अवकाश की अवधि को पात्रता की गणना में शामिल किया जाएगा। स्थानीय निकाय और विकास प्राधिकरण भी लाभ की स्थिति में अपने कर्मचारियों को बोनस दे सकेंगे, लेकिन इसका पूरा वित्तीय भार संबंधित संस्थान को अपने संसाधनों से उठाना होगा। सरकार की ओर से इसके लिए अतिरिक्त अनुदान नहीं दिया जाएगा।
बोनस का भुगतान नकद किया जाएगा और इसकी धनराशि संबंधित कर्मचारियों के वेतन व्यय वाले लेखाशीर्षक में मानक मद ‘वेतन’ के अंतर्गत दर्ज होगी।
निगम कर्मचारी महासंघ ने जताया आभार
राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रकाश रणाकोटी ने सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि निगम कर्मचारी लंबे समय से बोनस की उम्मीद लगाए हुए थे। अब वित्तीय स्थिति के आधार पर निगमों को अपने स्तर पर निर्णय लेने का अधिकार मिलने से पात्र कर्मचारियों को लाभ मिलने का रास्ता खुला है।
रणाकोटी ने सचिव विनय शंकर पांडेय का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी निगम और सार्वजनिक उपक्रम अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन कर पात्र कर्मचारियों को जल्द बोनस देंगे। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा।




