
देहरादून: उत्तराखण्ड पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ की अध्यक्षता में सरदार पटेल भवन स्थित सभागार में कुंभ मेला 2027 की तैयारियों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कुंभ मेला के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, तकनीकी निगरानी और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।
बैठक में डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि कुंभ मेला 2027 के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करें और उसकी समय-समय पर समीक्षा करें, ताकि मेले के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो और श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित अनुभव मिले।
- उत्तराखण्ड पुलिस की पूर्ण प्रतिबद्धता
बैठक के दौरान डीजीपी श्री दीपम सेठ ने कहा –
“उत्तराखण्ड पुलिस कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से कुंभ मेला 2027 को सुगम और सुरक्षित बनाया जाएगा। पुलिस बल पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करेगा।”
कुंभ मेला 2027 की सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के लिए दिए गए निर्देश
- व्यापक सुरक्षा रणनीति
पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी बढ़ाने के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
ड्रोन और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल कर सुरक्षा को और पुख्ता किया जाएगा।
किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खुफिया तंत्र को और अधिक सक्रिय किया जाएगा।
अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती के साथ-साथ अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांग भी की जाएगी।
- यातायात एवं संचार प्रबंधन
कुंभ मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक यातायात प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।
मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए वैकल्पिक मार्गों की योजना बनाई जाएगी।
रेलवे, बस और अन्य परिवहन सुविधाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए परिवहन विभाग के साथ समन्वय किया जाएगा।
संचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस वायरलेस नेटवर्क को अपग्रेड किया जाएगा, ताकि सभी विभागों के बीच त्वरित समन्वय बना रहे।
- आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सुविधाएं
मेला क्षेत्र में किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आपातकालीन निकासी योजना (Emergency Evacuation Plan) तैयार की जाएगी।
एसडीआरएफ, बम डिस्पोजल टीम और जल पुलिस को अपनी तैयारियों का आकलन कर विस्तृत योजना बनाने के निर्देश दिए गए।
पुलिस बल को विशेष तैराकी प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई, ताकि गंगा नदी में किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित बचाव अभियान चलाया जा सके।
अग्नि सुरक्षा प्लान तैयार कर सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर अग्निशमन यंत्रों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।
- रेलवे और परिवहन प्रबंधन
भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए रेलवे अधिकारियों के साथ समन्वय कर विशेष ट्रेनें संचालित करने की योजना तैयार की जाएगी।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शटल बस सेवा और पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जाएगा।
- मेला क्षेत्र का बुनियादी ढांचा और निर्माण कार्य
मेला क्षेत्र में सभी आवश्यक निर्माण कार्यों की समय रहते समीक्षा कर उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।
स्नान घाटों की स्थिति का मूल्यांकन कर सुरक्षा उपायों को पुख्ता किया जाएगा।
महत्वपूर्ण स्थलों पर राहत शिविर और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
- श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ नियंत्रण
सभी स्नान घाटों के आगमन और निकास बिंदुओं का स्पष्ट चिन्हांकन किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आपातकालीन निकासी योजना बनाई जाएगी।
श्रद्धालुओं को सही दिशा-निर्देश देने के लिए सूचना केंद्र और वॉलंटियर टीमों की तैनाती की जाएगी।
- कुंभ मेला 2027 की सुरक्षा व्यवस्था हेतु कोर टीम का गठन
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, हरिद्वार को निर्देश दिया गया कि कुंभ मेले के लिए एक कोर टीम का गठन किया जाए।
संभावित अधिकारियों और कर्मियों की सूची तैयार कर समय पर उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों को समय रहते समझ सकें और प्रभावी योजना बना सकें।
- बैठक में उपस्थित अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में वी. मुरूगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था), नीलेश आनंद भरणे, पुलिस महानिरीक्षक (अपराध एवं कानून व्यवस्था), नारायण सिंह नपलच्याल, पुलिस महानिरीक्षक (यातायात), राजीव स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक (गढ़वाल परिक्षेत्र), धीरेन्द्र गुंज्याल, पुलिस उप महानिरीक्षक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
उत्तराखण्ड पुलिस का लक्ष्य है कि कुंभ मेला 2027 को श्रद्धालुओं के लिए पूर्णतः सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाया जाए। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं, ताकि मेले के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो और श्रद्धालु निर्बाध रूप से अपने आध्यात्मिक अनुभव को प्राप्त कर सकें।