उत्तराखंड

प्रसिद्ध ज्वालपा धाम में मंदिर सौंदर्यीकरण के लिए भूमि पूजन किया गया

सतपुली: ज्वालपा माता की जयकारे और ढोल दमाऊं पर पारंपरिक नृत्य तालों के मध्य हर्षोल्लास के साथ नाचते गाते मां ज्वालपा के भक्तगण ज्वालपा देवी मंदिर के बाह्य स्वरूप के सौंदर्यीकरण के लिए भूमि पूजन सम्पन्न हुआ। श्री ज्वालपादेवी सिद्धपीठ पूजा समिति और श्री ज्वालपा देवी मंदिर समिति द्वारा संयुक्त रूप से श्री ज्वालपा देवी मंदिर के वर्तमान स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन किए, मंदिर के बाह्य स्वरूप का सौंदरीयकरण के लिए भूमि पूजन समारोह में
मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित श्री तीरथ सिंह रावत (पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद गढ़वाल संसदीय क्षेत्र) मुख्य यजमान की भूमिका निभाई।
अक्षय तृतीया के दिन 10 मई शुक्रवार के दिन दोपहर 12.06 से 12.58 बजे तक अभिजित मुहूर्त में यह समारोह संपन्न हुआ। मां ज्वालपा के भक्त आस पास के गावों से ढोल दमाऊं बजाते हुए, नए और उत्सवी परिधानों से सुसज्जित नर नारियां समारोह स्थल पर आए।

समारोह मंडप ज्वालपा धाम स्थित संस्कृत विद्यालय के प्रांगण में बनाया गया था। ज्वालपा धाम संस्कृत विद्यालय और महाविद्यालय के छात्र पंडित भास्कर ममगाई और पंडित सुरेंद्र कुकरेती के नेतृत्व में स्वस्तिवाचन करते हुए सभा मंडप में अतिथियों की अगवानी करते हुए पहुंचे।

श्री ज्वालपा देवी सिद्धपीठ पूजा समिति के अध्यक्ष सतीश अणथ्वाल और श्री ज्वालपा देवी मंदिर समिति के अध्यक्ष कर्नल शांति प्रसाद थपलियाल (से. नि.) ने मुख्य अतिथि तीरथ सिंह रावत का स्वागत किया।

दोनों समितियों के पदाधिकारियों ने भी मालाएं पहनाकर अभिनंदन किया। मंचस्थ अन्य प्रमुख व्यक्ति थे- शिवदयाल बौंठियाल, भगवती प्रसाद अणथ्वाल, रमेश चंद्र थपलियाल, उमेश नौडियाल, रविन्द्र बिष्ट, संजय अणथ्वाल, रोहित अणथ्वाल देवेंद्र बिस्ट, भास्करानंद अणथ्वाल, चक्रधर अणथ्वाल अनिल किशोर अणथ्वाल, अनिल थपलियाल और राजेश थपलियाल।

सिद्धपीठ पूजा समिति के अध्यक्ष सतीश अणथ्वाल ने अतिथियों के स्वागत करते हुए बताया कि लंबे समय से ज्वालपा देवी के मंदिर के बाह्य स्वरूप का सौंदर्यीकरण का संकल्प पूजा समिति और मंदिर समिति की कार्य योजना में था। अंतत अक्षय तृतीया के दिन अभिजित मुहूर्त में भूमिपूजन का काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोकसभा चुनावों के कारण आदर्श आचार संहिता लागू है इसलिए समारोह में पूर्ण रूप से आचार संहिता का पालन किया जा रहा है। मंदिर समिति के अध्यक्ष कर्नल शांति प्रसाद थपलियाल ने बताया कि इस आयोजन के लिए 9 वर्ष पूर्व दोनों समितियों के मध्य आरंभिक चिंतन हुआ। 2021 में दोनो समितियों के मध्य सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए। इससे पूर्व दो बार भूमिपूजन के अवसर बने लेकिन कारण विशेष से पूरे नही हो सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान मंदिर में कोई छेड़छाड़ किए बिना यह सौंदर्यीकरण मंदिर के बाह्य भाग का किया जाएगा। उन्होंने इस काम में सभी की सहभागिता पर बल दिया।

 

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