गढ़वाल में भूमि फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई: 24 मामलों में FIR के निर्देश, 125 प्रकरणों की समीक्षा

- सीएम की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत आयुक्त विनय शंकर पांडेय सख्त, खसरा हेरफेर और दोहरी बिक्री जैसे मामलों में कार्रवाई तेज
देहरादून: मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें भूमि फर्जीवाड़े से जुड़े कुल 125 मामलों की सुनवाई की गई। इनमें 20 पुराने लंबित और 105 नए मामले शामिल थे। समीक्षा के दौरान 45 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि 24 गंभीर प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में सामने आया कि नए मामलों में सबसे अधिक 74 प्रकरण देहरादून जिले से संबंधित हैं। इसके अलावा हरिद्वार के 15, पौड़ी के 13, टिहरी के 2 और चमोली का 1 मामला समिति के समक्ष आया। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा जिन मामलों में संयुक्त निरीक्षण आवश्यक है, उनकी रिपोर्ट इसी सप्ताह प्रस्तुत की जाए।
आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने कहा कि लैंड फ्रॉड मामलों की समीक्षा हर 15 दिन में की जा रही है और किसी भी प्रकार की भूमि धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जिनमें बिना जमीन के बिक्री, खसरा नंबर में हेरफेर कर दूसरी भूमि बेचना तथा कम भूमि को अधिक बताकर बेचने जैसे गंभीर फर्जीवाड़े शामिल हैं।
बैठक में जिन मामलों में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए, उनमें उदय सिंह, सुचेता सेमवाल, राजीव जायलवाल, गुलाब सिंह, किरन बागड़ी, अजय कुमार, संजीव गर्ग, मिथलेश सिंघल, जगदंबा रावत, अर्जुन सिंह और सामरजी देवी समेत कई शिकायतें शामिल हैं। इन मामलों में भूमि पर अवैध कब्जा, तारबाड़ कर जमीन घेरने और जमीन खुर्द-बुर्द करने जैसी शिकायतें सामने आईं। आयुक्त ने पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा 45 अन्य मामलों का भी निस्तारण किया गया। कुछ मामलों में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया, जबकि कुछ मामलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद धनराशि वापस कर विवाद सुलझा लिया गया। वहीं कुछ प्रकरण सिविल न्यायालय में लंबित पाए गए, जिनमें भूमि धोखाधड़ी नहीं पाई गई। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का निस्तारण न्यायालय के माध्यम से ही किया जाएगा।
आयुक्त ने बड़े भू-प्रकरणों में कार्रवाई में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि 15 दिनों के भीतर लंबित मामलों में ठोस प्रगति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में अवैध निर्माण सिद्ध हो चुका है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए और स्पष्ट भूमि धोखाधड़ी के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिन मामलों में भूमि धोखाधड़ी नहीं पाई जाती, उसकी जानकारी शिकायतकर्ताओं को भी दी जाए।
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान, अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, एसपी ग्रामीण जया बलूनी, डीजीसी नितिन वशिष्ट समेत विभिन्न जिलों और तहसीलों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से भी मौजूद रहे।




