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एटीएस कॉलोनी का आतंक खत्म: दबंग बिल्डर पुनीत अग्रवाल को 6 माह का जिला बदर

  • डीआरडीओ वैज्ञानिक से मारपीट और दहशत फैलाने के आरोपों पर प्रशासन सख्त
  • पांच मुकदमे पहले से दर्ज

देहरादून: सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में कथित तौर पर आतंक और दहशत का माहौल बनाने वाले बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है।

जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड गुंडा नियंत्रण अधिनियम-1970 की धारा 3(3) के तहत पुनीत अग्रवाल को “गुंडा” घोषित करते हुए छह माह के लिए देहरादून जनपद से जिला बदर करने के आदेश जारी किए हैं।

मामले में जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की। प्रशासन के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले से पांच आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और उसका व्यवहार क्षेत्र में भय व असुरक्षा का कारण बन रहा था। आदेश के तहत आरोपी अगले छह माह तक बिना अनुमति देहरादून जिले की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

प्रकरण की शुरुआत 25 अप्रैल 2026 को एटीएस कॉलोनी निवासी और डीआरडीओ वैज्ञानिक हेम शिखा समेत अन्य लोगों द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र से हुई।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि 13 अप्रैल को पुनीत अग्रवाल ने डीआरडीओ में कार्यरत वैज्ञानिक के परिवार के साथ मारपीट की, जिसमें पीड़ित का कान का पर्दा फट गया। महिलाओं और बुजुर्गों के साथ अभद्रता तथा धमकी देने के आरोप भी लगाए गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने उप जिलाधिकारी मसूरी से गोपनीय जांच कराई।
जांच में स्थानीय निवासियों ने आरोपी के व्यवहार को भय पैदा करने वाला बताया। थाना रायपुर में दर्ज एफआईआर, वायरल वीडियो और सामूहिक शिकायतों को भी न्यायालय ने गंभीरता से लिया। डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं निदेशक मनोज कुमार ढाका ने भी कार्रवाई की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी की गतिविधियां जनसुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी हैं। वहीं बचाव पक्ष ने मामले को आपसी विवाद बताया, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को अभ्यस्त आपराधिक प्रवृत्ति का माना।

प्रशासन के अनुसार आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 115(2), 351(2), 352, 74, 126(2), 324(4) और 447 के तहत मुकदमे दर्ज हैं। इससे पहले दीपावली के दौरान नाबालिग बच्चों पर पिस्टल लहराने के मामले में जिला प्रशासन ने उसका शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर हथियार जब्त किया था।

आरोप है कि आरोपी ने आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों से मारपीट, बच्चों को धमकाने, गाली-गलौज, झूठे मुकदमों में फंसाने और अवैध कब्जे जैसे मामलों में भी विवाद खड़े किए। जिला प्रशासन ने कहा कि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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